Rukh Publications
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Publisher
New Delhi
Joined November 2019
दुःख की दुनिया भीतर है / @sushiljadu **** पुस्तक प्राप्त करने का लिंक : https://t.co/qyoWER31PZ
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'अधूरी चीज़ों का देवता' को कथेतर गद्य के लिए प्रतिष्ठित 'वागीश्वरी पुरस्कार' दिया गया है। इसके लिए निर्णायक मंडल, मित्रों और पाठकों का आभारी हूँ। इस किताब का नया संस्करण जल्द ही आएगा।
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पहला उपन्यास ‘लौ’ Rukh से प्रकाशित पहली कथा-कृति है, इसलिए हमारे लिए विशिष्ट भी। पुस्तक यहाँ से प्राप्त की जा सकती है : https://t.co/yaekOV8oQQ
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‘मुझे यक़ीन था कि एक दिन माँ नहीं रहेंगी.’ यह पंक्ति धक से धड़कन रोक सी देती है. इस किताब में ऐसा बहुत दफ़ा होता है. लेकिन बहुत दफ़ा आनंद आता जाता है. अपने परिवार और परिजनो�� के साथ-साथ व्योमेश कई सारे रिश्तों के बारे में भी बताते हैं तथा पुस्तक के शीर्षक को व्यापक बनाते जाते हैं.
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जल्द ही अपने पाठकों के पास : गार्जियनता #guardianta #vyomeshshukla #rukhpublications #bookpublishing #hindiliterature #memoirs #family #hindibooks
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'माँ कहती थी : जो दर्पण टूट जाए उसमें छवि नहीं देखा करते उसने यह नहीं बताया था कि दूसरा दर्पण होता नहीं है' ~ पंकज चतुर्वेदी ______________________________ {'आकाश में अर्द्धचन्द्र', रुख़ पब्लिकेशन्स @Rukhpub, नयी दिल्ली, 2022}
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•जब भी अनुचित कुछ• ______________ "जब भी अनुचित कुछ कह जाता हूँ पछताता हूँ पाता हूँ : दुर्लभ है हृदय की निर्मलता" __________ ('आकाश में अर्द्धचन्द्र', संग्रह 2022,से) #पंकज_चतुर्वेदी @PANKAJ_C1 {Art Courtesy : @smritiii_01} @Rukhpub
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उम्मीद प्रेम का अन्न है @jianuragji Click to buy : https://t.co/VZDEcnH6jV
#ummeedpremkaannahai #anuragvats #rukhpublications #poetry #hindipoem
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‘उम्मीद प्रेम का अन्न है’ प्रेम और मृत्यु के इर्द-गिर्द लिखी गई कविताओं की किताब है। कुल 44 कविताओं के साथ गद्य का एक टुकड़ा भी है, जिसे कविता के फ़ुटनोट के तौर पर भी पढ़ा जा सकता है। @Rukhpub
https://t.co/Z84wKbh7ag
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"हर ओट का इस्तेमाल हम छिपने के लिए करते हैं. यह देह भी महज़ छिपने की एक जगह है." किताब - अधूरी चीज़ों का देवता लेखक - गीत चतुर्वेदी
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'आकाश में अर्द्धचन्द्र' से एक कविता 'अब हर चीज़' का संवेदनशील और सुन्दर पाठ किया है सोमेश त्रिपाठी 'निर्झर' ने। साभार प्रस्तुत : @jianuragji
@khwabidapanchhi
@Rukhpub
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सुरमई सरगम : मैं काफी दिनों से रो नहीं पा रही हूँ, लेकिन “बिल्लियाँ” पढ़ते पढ़ते मैं रोने लगी और वो बड़ी राहत की बात लग रही है मुझे, ऐसा नहीं है कि मैं उस परेशानी से आज़ाद हो गयी हूँ फिर भी बहुत सांस लेने जैसा महसूस हुआ उस दिन रो कर। @GeetChaturvedi @Rukhpub
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लंदन में बस के सफ़र में अपनी प्रिय पुस्तक के साथ कवि-मित्र समर्थ वशिष्ठ @Rukhpub || @GeetChaturvedi
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"आंसू जो छलक गया आंख से... सबूत है कि बर्तन भर गया दुःख का...!" ~पंकज चतुर्वेदी ("आकाश में अर्द्धचन्द्र ":संग्रह: जहां भावनाओं की नदी,घुटन का सैलाब,अनुराग की शीतल बयार, मानवीय मूल्यों का क्षरण,सियासत के दावपेंच से उभरी जनसंत्रास की मुखर पीड़ा,निराशाओं के मध्य आशाओं का सेतु है।)
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'यही' मैं उसके दरवाज़े पर दस्तक देता या वह मेरे प्राणों के लिए यही सबसे काम्य था मगर यही सबसे मुश्किल था दुनिया में.. (#आकाश_में_अर्द्धचन्द्र:काव्य संग्रह: "तेजी से बदलते समाज,मूल्य,राग,विराग सियासत,संत्रास को ध्वनित करती कविताएं") ~पंकज चतुर्वेदी✍️ {Art Courtesy:Pankaj Dixit}
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'माँ बच्चे के दोष देखती भी है तो उसे अपनी ही विफलता मानती है अगर वह भी उसे क़ुसूरवार ठहराती तो दुनिया में मनुष्य की कोई शरण न होती' ~ पंकज चतुर्वेदी _________________________ {'आकाश में अर्द्धचन्द्र', @Rukhpub से} [Art Courtesy : सिरिस सिरिस]
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.@ShuklaVyomesh एक ऐसे कवि जो कभी डाकू बनना चाहते थे... की @Rukhpub से प्रकाशित 'आग और पानी' किताब बनारस को उसके सबसे गाढ़े और मनोहर रंगों में पहचानती है.. इस पुस्तक पर लेखक से वरिष्ठ पत्रकार @jai_shiven की बतकही. https://t.co/RP3pnnydvF
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आख़िरकार, लंबे इंतज़ार के बाद किताब मिल ही गई, वो भी उनसे जिन्होंने पढ़ना बताया, धन्यवाद @vnkwinks
@saurabhtop @TheLallantop @Rukhpub
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कल रात दफ़्तर से वापस लौटा तो किताबों का एक जोड़ा मेरा इंतज़ार कर रहा था। कोई हाथ में कलम पकड़कर किताब के शीर्षक वाले पन्ने पर आपका नाम लिखे और अपनी किताबें आत्मीयता के साथ दुनिया के सबसे पुराने शहर बनारस से सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजे… तो उसे ग्रहण करना एक सुख है.. धीमी आँच पर
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वाह मेरे दिल की बात लिख दी आपने,जिसने किताब लिखी @VyomeshShukla जी उसके हथों उसी किताब के पन्ने पर ख़ुद का नाम और स्���ेह पढ़ना,आत्मा को तृप्त कर गया हो जैसे,आँखें भर आयीं हैं और शब्दशून्य एक दम ग़ुम हूँ @jianuragji जी आपक��� साधना का तो मैं क्या ही कहूँ आप दोनो महात्माओं को सादर🙏🏻🙏🏻
कल रात दफ़्तर से वापस लौटा तो किताबों का एक जोड़ा मेरा इंतज़ार कर रहा था। कोई हाथ में कलम पकड़कर किताब के शीर्षक वाले पन्ने पर आपका नाम लिखे और अपनी किताबें आत्मीयता के साथ दुनिया के सबसे पुराने शहर बनारस से सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजे… तो उसे ग्रहण करना एक सुख है.. धीमी आँच पर
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