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सदानीरा

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• विश्व कविता और अन्य कलाओं की पत्रिका • Hindi journal of world poetry and contemporary art

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@hindwiOfficial
Hindwi
11 days
समकालीन कविता के परिदृश्य में जहाँ मुक्तछंद की उपस्थिति व्यापक है; वहीं छंदबद्ध कविता आज भी अपनी लय, अनुशासन और संगीतात्मकता के कारण पाठकों और श्रोताओं के बीच एक विशिष्ट स्थान बनाए हुए है। इसी परंपरा और समकालीनता को समर्पित एक विशेष आयोजन ‘छंद-छंद पर कुमकुम’ ‘हिन्दवी’ की तरफ़ से
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@sadaneera
सदानीरा
1 month
अखिलेश सिंह की नई कविताएँ :: https://t.co/Pckdel5NQ8
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@sadaneera
सदानीरा
1 month
मुझे नहीं चाहिए वह ख़ुदा जो मुझसे क़यामत के रोज़ मुख़ातिब होगा। • अनस ख़ान लिंक : https://t.co/Dbp432ARne
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@sadaneera
सदानीरा
2 months
जयंत शुक्ल की कविताएँ :: https://t.co/8ICMn6Lx4L
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@sadaneera
सदानीरा
2 months
अमित झा की कविताएँ : https://t.co/xC4y3RUzLM
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@sadaneera
सदानीरा
2 months
जतिन की कविताएँ : https://t.co/dm9bFDq5uh
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@hindwiOfficial
Hindwi
2 months
शशि शेखर का जन्म 6 मार्च 1992 को बिहार के बख़्तियारपुर में हुआ। उन्होंने दसवीं तक की शिक्षा May Flower स्कूल, पटना से प्राप्त की तथा केंद्रीय विद्यालय शेख़पुरा, पटना से उन्होंने बारहवीं (कला) में प्रथम स्थान पाया। स्नातक की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू महाविद्यालय
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@sadaneera
सदानीरा
3 months
सोमेश शुक्ल की नई कविताएँ :: https://t.co/RNjQxBphV0
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@sadaneera
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3 months
मैं कश्मीर हूँ इसलिए फाड़ देता है मेरा भारत मुझे... ~ बहुत भूख है तुम लोगों को, तुम मेरी आज़ादी खाओ। • बेबी शॉ बांग्ला से अनुवाद : अमृता बेरा लिंक : https://t.co/gw3gvAVKuh
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@sadaneera
सदानीरा
3 months
"नदी के किनारे दो बार रोने का कोई फ़ायदा नहीं पहली लहर उसे पैदा करती है दूसरी लहर उसे मिटा देती है।" [ग़ज़ा के कवियों-लेखकों की कविताएँ और पत्र]
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ग़ज़ा से कुछ कविताएँ और पत्र :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : जोशना बैनर्जी आडवानी
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@sadaneera
सदानीरा
3 months
मनोज कुमार झा की नई कविताएँ :: https://t.co/DzDf77VuSO
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@sadaneera
सदानीरा
3 months
मैंने दफ़्तर में इक नौकरी ढूँढ़ ली थोड़ा-थोड़ा वहाँ रोज़ मरता रहा, मेरा सारा बदन ज़र्द होता रहा, दर्द होता रहा, मैं नहीं रो सका • शोएब कियानी लिप्यंतरण : ज़ुबैर सैफ़ी https://t.co/hedfz83Ahs
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शोएब कियानी की नज़्में :: उर्दू से लिप्यंतरण : ज़ुबैर सैफ़ी
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@sadaneera
सदानीरा
3 months
रात की तख़्ती पे लिक्खा चाँद ने जो नूर वो बना इस शहर का चाँदी-नुमा दस्तूर • तसनीफ़ हैदर https://t.co/AXAV9GJjl9
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नज़्म :: तसनीफ़ हैदर
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@sadaneera
सदानीरा
4 months
प्रत्यूष चंद्र मिश्र की लंबी कविता यहाँ पढ़िए : https://t.co/11wm2FHIsb
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@sadaneera
सदानीरा
4 months
नईम सरमद की ग़ज़लें :: https://t.co/uGGoFomumH
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@sadaneera
सदानीरा
4 months
|| हार्डिंग पार्क || पैरों तले बिछी हरी दूब मूँगफली तोड़ती उँगलियाँ आँखों की बाढ़ में डूबता अकेलापन दिमाग़ में सागर-प्रिया की अँगूठी चलो चलें, मीनाक्षी! बहुत बीमार लगता है अब यह शहर! • महाप्रकाश मैथिली से अनुवाद : बालमुकुंद लिंक : https://t.co/b8EG9xD4cv
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@sadaneera
सदानीरा
4 months
प्रेम के सारे मानक धीरे-धीरे छोड़ रहे थे अपना रंग यह कैसा विचित्र समयदोष था कि निरंतरता पर प्रहार करता हुआ वह आँखों को भींचकर मासूम-सी अदा में उँगलियों पर गिनवा सकता था अपने सारे एफ़र्ट • गुंजन उपाध्याय पाठक https://t.co/4hW39jct91
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कविताएँ :: गुंजन उपाध्याय पाठक
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@sadaneera
सदानीरा
4 months
पंकज प्रखर कृत पैरोडियाँ : https://t.co/P2voZPYFvX
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@sadaneera
सदानीरा
4 months
राम को बहुत चाहने वाले को विरह मिलता है पर शोक नहीं प्रभु के विरह में प्रभु का नाम मिलता है भक्ति मिलती है नवधा क्षण भर में • सुघोष मिश्र https://t.co/HM1T7VTQMS
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कविताएँ :: सुघोष मिश्र
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@sadaneera
सदानीरा
5 months
अपूर्वा श्रीवास्तव की नई कविताएँ :: https://t.co/Y0Kec2v3nv
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