सदानीरा
@sadaneera
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• विश्व कविता और अन्य कलाओं की पत्रिका • Hindi journal of world poetry and contemporary art
Joined October 2017
समकालीन कविता के परिदृश्य में जहाँ मुक्तछंद की उपस्थिति व्यापक है; वहीं छंदबद्ध कविता आज भी अपनी लय, अनुशासन और संगीतात्मकता के कारण पाठकों और श्रोताओं के बीच एक विशिष्ट स्थान बनाए हुए है। इसी परंपरा और समकालीनता को समर्पित एक विशेष आयोजन ‘छंद-छंद पर कुमकुम’ ‘हिन्दवी’ की तरफ़ से
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मुझे नहीं चाहिए वह ख़ुदा जो मुझसे क़यामत के रोज़ मुख़ातिब होगा। • अनस ख़ान लिंक : https://t.co/Dbp432ARne
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शशि शेखर का जन्म 6 मार्च 1992 को बिहार के बख़्तियारपुर में हुआ। उन्होंने दसवीं तक की शिक्षा May Flower स्कूल, पटना से प्राप्त की तथा केंद्रीय विद्यालय शेख़पुरा, पटना से उन्होंने बारहवीं (कला) में प्रथम स्थान पाया। स्नातक की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू महाविद्यालय
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मैं कश्मीर हूँ इसलिए फाड़ देता है मेरा भारत मुझे... ~ बहुत भूख है तुम लोगों को, तुम मेरी आज़ादी खाओ। • बेबी शॉ बांग्ला से अनुवाद : अमृता बेरा लिंक : https://t.co/gw3gvAVKuh
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"नदी के किनारे दो बार रोने का कोई फ़ायदा नहीं पहली लहर उसे पैदा करती है दूसरी लहर उसे मिटा देती है।" [ग़ज़ा के कवियों-लेखकों की कविताएँ और पत्र]
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ग़ज़ा से कुछ कविताएँ और पत्र :: अँग्रेज़ी से अनुवाद : जोशना बैनर्जी आडवानी
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मैंने दफ़्तर में इक नौकरी ढूँढ़ ली थोड़ा-थोड़ा वहाँ रोज़ मरता रहा, मेरा सारा बदन ज़र्द होता रहा, दर्द होता रहा, मैं नहीं रो सका • शोएब कियानी लिप्यंतरण : ज़ुबैर सैफ़ी https://t.co/hedfz83Ahs
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शोएब कियानी की नज़्में :: उर्दू से लिप्यंतरण : ज़ुबैर सैफ़ी
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रात की तख़्ती पे लिक्खा चाँद ने जो नूर वो बना इस शहर का चाँदी-नुमा दस्तूर • तसनीफ़ हैदर https://t.co/AXAV9GJjl9
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नज़्म :: तसनीफ़ हैदर
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|| हार्डिंग पार्क || पैरों तले बिछी हरी दूब मूँगफली तोड़ती उँगलियाँ आँखों की बाढ़ में डूबता अकेलापन दिमाग़ में सागर-प्रिया की अँगूठी चलो चलें, मीनाक्षी! बहुत बीमार लगता है अब यह शहर! • महाप्रकाश मैथिली से अनुवाद : बालमुकुंद लिंक : https://t.co/b8EG9xD4cv
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प्रेम के सारे मानक धीरे-धीरे छोड़ रहे थे अपना रंग यह कैसा विचित्र समयदोष था कि निरंतरता पर प्रहार करता हुआ वह आँखों को भींचकर मासूम-सी अदा में उँगलियों पर गिनवा सकता था अपने सारे एफ़र्ट • गुंजन उपाध्याय पाठक https://t.co/4hW39jct91
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कविताएँ :: गुंजन उपाध्याय पाठक
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राम को बहुत चाहने वाले को विरह मिलता है पर शोक नहीं प्रभु के विरह में प्रभु का नाम मिलता है भक्ति मिलती है नवधा क्षण भर में • सुघोष मिश्र https://t.co/HM1T7VTQMS
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कविताएँ :: सुघोष मिश्र
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