पारदर्शी_पंक्तियां
@pardarshipankti
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आइए जीवन का मर्म शब्दों/वाक्यों में प्रस्तुत करते हैं।🙂 प्रेम, साहित्य, लेख, कविता, शायरी, हिंदी, व्यंग्य...! अपनी मातृ भाषा पर सदैव गौरवान्वित रहें।🌻
Joined October 2022
राम चाहे सिंहासन पर हों या कुशा के आसन पर, वह सीता के बिना सदैव अधूरे ही रहेंगे।।❤️🙏🏻
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हार्ट ट्रांसप्लांट करवाऊँ तो क्या वो दिल से निकल जाएगी क्या 🥹❤️
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जिनके हिस्से प्रेम नहीं आया जिन्हें नहीं मिला अपने पसंदीदा शख्स का साथ वो फिर लग गए घर के हालात ठीक करने में उन्होंने फिर कभी प्रेम को ना चुनकर हमेशा के लिए संघर्ष को चुना।
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फ़क़त ज़ंजीर बदली जा रही थी मैं समझा था रिहाई हो गई है
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'उगी थी ज्योति जग को तारने ��ो । न जन्मा था पुरुष वह हारने को ।
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सफ़ेद चादर सा मन मेरा, उस पर हल्दी वाला ज़िद्दी दाग हो तुम..!! ❤️
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केंद्र बनने की चाह मत रखो, पीछे हटो, मुक्त होना सीखो.... मुक्ति देना सीखो....
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